दिशीत जरीवाला केस: एक दिल दहला देने वाली क्राइम स्टोरी
27 जून 2016 को सूरत के प्लस पार्ले पॉइंट इलाके में स्थित सर्जन सोसायटी के फ्लैट नंबर 55A में जो घटना घटी, उसने पूरे शहर को हिला कर रख दिया। दिशीत जरीवाला, जो सूरत के प्रतिष्ठित कपड़ा व्यापारी थे, अपने घर में क्रूरता से कत्ल कर दिए गए। इस पूरी वारदात ने मीडिया, पुलिस और पूरे समाज का ध्यान खींच लिया था। आइए, जानते हैं इस दर्दनाक और खतरनाक कहानी के हर पहलू को।
दिशीत जरीवाला की जिंदगी
दिशीत जरीवाला मात्र 26 साल की उम्र में एक सफल कपड़ा व्यापारी बन गए थे। उनके खुद के टेक्सटाइल उद्योग थे और वे सूरत की डायमंड सिटी में एक जानी-मानी शख्सियत थे। दिशीत की शादी वेलसी नाम की महिला से हुई थी और उनकी डेढ़ साल की एक प्यारी बेटी भी थी। सब कुछ सही चल रहा था, मानो जीवन सुकून से भरा हो। लेकिन नियती को कुछ और ही मंजूर था।
27 जून की काली रात
उस रात दिशीत, अपनी पत्नी वेलसी और बेटी के साथ एक रिश्तेदार के घर डिनर करके 9:04 बजे के करीब अपने घर लौटे। सब कुछ सामान्य था, लेकिन तभी दिशीत ने कहा कि पार्किंग की लाइट बंद करना भूल गए हैं। वे नीचे लाइट बंद करने के लिए गए, लेकिन वापस नहीं आए। जब वेलसी नीचे जाकर देखती हैं तो तीन नकाबपोश बदमाश दिशीत के गले पर चाकू रखे हुए उसे ऊपर की ओर लेकर जा रहे थे।
बदमाशों ने उन्हें उनके बेडरूम में बंधक बना लिया। लूटपाट के दौरान उन्होंने सारी कीमती चीजें, कैश और वेलसी के गहने भी लूटे। इसके बाद वेलसी और उनकी बेटी को बाथरूम में बंद कर दिया गया। घंटों बंद रहने के बाद वेलसी ने बाथरूम की खिड़की तोड़ी और मदद के लिए पुकारा।
पुलिस की जांच
पड़ोसियों की मदद से पुलिस मौके पर पहुंची। दिशीत का शव बेडरूम में खून से लथपथ पाया गया और घर का सारा सामान तितर-बितर था। शुरू में यह मामला लूट और हत्या का लग रहा था, लेकिन जांच में कई सवाल खड़े होने लगे। जिन सीसीटीवी फुटेज की जांच हुई, उनमें यह पता चला कि दिशीत के घर जाते समय एक ऑटो उनका पीछा कर रहा था। बाद में दो लोग दिशीत के घर में घुसते दिखे, लेकिन उनका चेहरा कैमरे में स्पष्ट नहीं था।
इतना सावधानीपूर्वक और सुनियोजित हमला किसी बाहरी का नहीं लग रहा था, जिससे पुलिस को शक और गहरा हो गया कि यह किसी अंदरूनी व्यक्ति का काम हो सकता है।
शक के घेरे में वेलसी
जांच के दौरान कई तथ्यों ने पुलिस का ध्यान खींचा। वेलसी के बयान में कुछ चीजें मेल नहीं खा रहीं थीं। पहले तो वेलसी ने कहा कि पार्किंग लाइट नीचे ही बंद हो सकती थी, जबकि फर्स्ट फ्लोर से भी लाइट बंद हो सकती थी। इसके अलावा, वेलसी के अनुसार घर में तीन बदमाश थे जबकि सीसीटीवी फुटेज में सिर्फ दो बदमाश देखे गए थे।
सबसे बड़ा सवाल यह था कि अगर लूटपाट का इरादा था, तो बदमाशों ने दिशीत के पहने हुए महंगे गहनों को क्यों नहीं उतारा?
वेलसी का चौंकाने वाला रहस्योद्घाटन
करीब 60 घंटे की कड़ी पूछताछ और तथ्यों के दबाव के बाद वेलसी टूट गई। उसने स्वीकारा कि उसने अपने प्रेमी सुकेतु मोदी और उसके ड्राइवर धीरेंद्र के साथ मिलकर अपने पति दिशीत की हत्या करवाई थी। वेलसी और सुकेतु का संबंध शादी से पहले का था, और वे एक-दूसरे से बेहद प्यार करते थे। वेलसी चाहती थी कि वह सुकेतु के साथ रहे लेकिन समाज और दिशीत की संपत्ति के चलते उसने डायवोर्स की जगह हत्या का रास्ता चुना।
धीरेंद्र और सुकेतु की भूमिका
धीरेंद्र, जो सुकेतु का ड्राइवर था, इस जघन्य योजना में सहभागी बना। हत्या से कुछ दिन पहले दोनों ने दिशीत के घर की रेकी की और हत्या का पूरा प्लान बनाया। 27 जून की रात उन्होंने दिशीत की हत्या बड़े ही बेरहमी से कर दी और उसके बाद घर में लूटपाट का नाटक रचा।
कोर्ट में मामला और अंतिम फैसला
हालांकि वेलसी और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन सीसीटीवी फुटेज और अन्य सबूत पूर्णतः साफ नहीं थे। कोर्ट में गवाही देने वाले अधिकांश गवाह बयानों से मुकर गए और पर्याप्त ठोस सबूत न होने की वजह से 31 दिसंबर 2019 को कोर्ट ने वेलसी, सुकेतु और धीरेंद्र को "बेनिफिट ऑफ डाउट" देते हुए रिहा कर दिया।
क्या सिखें?
यह कथा हमें यह सिखाती है कि रिश्तों में धोखा और लालच हमें कितना अंधा बना सकता है। वफादारी और ईमानदारी ही रिश्तों को जीवित रखने का मूल मंत्र है। यह कहानी एक बड़ा सबक है कि समाज की अपेक्षाओं और धन की लालसा के बीच इंसानियत की हानि न हो।
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